Wednesday, 3 August 2022

प्रेरणादायक कहानी "ऋषि चिंतन" - सफलता के साथ संतोष भी | Daily Story

आज 03अगस्त 2022 बुधवार, श्रावण शुक्लपक्ष षष्ठी
ऋषि चिंतन
सफलता के साथ संतोष भी

👉 किस वस्तु का उपयोग हमने कितनी कुशलता से किया, इसी पर सुखानुभूति निर्भर है । वस्तुओं की प्रचुरता व अच्छी से अच्छी परिस्थिति मिलने पर भी अपनी मानसिक रुग्ण स्थिति के कारण वही वस्तुएँ व श्रेष्ठ परिस्थितियां व्यर्थ सिद्ध होंगी । अतएव उपलब्ध साधन और परिस्थितियों का हम अधिक से अधिक सदुपयोग कितनी मात्रा में कर लेते हैं यह हमारे प्रयास व पुरुषार्थ पर निर्भर है ।

👉 अपनी अभिलाषाओं का क्षेत्र जितना ही विस्तृत होगा उतना ही हमें मानसिक असंतोष रहेगा । *यहाँ यह नहीं कहा जा रहा है कि मनुष्य को उत्साहहीन निष्क्रिय बैठे रहना चाहिए। होना यह चाहिए कि अपनी महत्वाकांक्षाओं की परिधि अपने उपलब्ध साधनों एवं परिस्थितियों तक ही सीमित रखनी चाहिए । इस प्रकार अपनी सीमा में किए गए प्रयासों से हमें आसानी से सफलता मिल जाएगी और मनोबल भी बढ़ेगा ।* आगे चलकर हम बड़े कार्य भी हाथ में ले सकते हैं और उन्हें पूरा करने  में उत्साह और आत्मविश्वास पूर्वक जुट सकते हैं ।इन लंबे और बड़े कार्यों को छोटे-छोटे खंडों में बाँटकर एक-एक को पूरा करते हुए आगे बढ़ा जाए, तो कालांतर में समग्र रूप से एक बहुत बड़ा कार्य होता हुआ दिखाई देगा । अतएव सफलताओं की बिना प्रतीक्षा किये अपने प्रयत्न पुरुषार्थ में ही सुख का अनुभव करते रहें । 

यही सच्ची कर्मनिष्ठा है और वह अनुभूति ही हमें विपरीत परिणाम मिलने पर भी आनंद व संतोष प्रदान करेगी ।

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