02 अगस्त 2022 मंगलवार
श्रावण शुक्लपक्ष पंचमी
‼️ऋषि चिंतन‼️
परिस्थिति नहीं - मनःस्थिति प्रमुख
👉 मनुष्य अपनी आकांक्षा पूर्ति के लिए अपने प्रयासों तक ही सीमित है। किसी काम को पूरा करने के लिए वह अपनी शक्ति भर प्रयत्न-पुरुषार्थ करता रहे तो उस कार्य में किन्हीं कारणों से सफलता न मिलने पर उसे अपने द्वारा किए गए प्रयासों से संतोष रहेगा । बार-बार प्रयत्न करने पर भी सफलता न मिलने पर झल्लाहट व क्षुब्ध हो जाना हमारी मानसिक कमजोरी ही कही जाएगी ।
👉 हमें जो साधन व परिस्थितियां उपलब्ध हैं, वे संसार में अनेकों को नहीं हैं और वे अभावों और कठिनाइयों में अपना जीवन यापन कर रहे हैं । ईश्वर को बार-बार धन्यवाद है कि उसने हम पर कृपा कर दुर्लभ परिस्थितियों में हमें स्थिर रखा । हमें अपने से अधिक साधन-सम्पन्नों से नहीं, अपने से निम्न स्थिति वालों से अपनी तुलना करनी चाहिए । यदि ऐसा कर लिया तो पहाड़ के समान लगने वाली बाधाएँ एवं विकराल दिखने वाली आपत्तियाँ हमें राई के समान तुच्छ दिखाई देगी ।
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